सर्वांगीण स्वास्थ्य का आधार है आध्यात्मिक स्वास्थ्यस्वास्थ्य ही हमारी सच्ची सम्पत्ति है। स्वास्थ्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और सच्चा खजाना है लेकिन आज हम देख रहे हैं कि सारा विश्व एक बहुत बड़ी हॉस्पिटल बन चुका है। प्रत्येक इंसान मरी॰ज बन चुका है। क्योंकि हम सर्वांगीण स्वास्थ्य की परिभाषा को देखें तो डब्ल्यू. एच.ओ. के मत के अनुसार
सर्वांगीण स्वास्थ्य माना शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रीति से स्वास्थ्य होना है। सिर्फ शरीर में बीमारी न होना, उसको ही स्वस्थ नहीं कहा जाता है। आज प्रत्येक इंसान काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, वैरभाव, घृणा, नफरत, तिरस्कार की भावना,...
